गोरखपुर : जिला जेल में इंटरकाम बना बंदियों का परिजनों से संपर्क का माध्यम

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गोरखपुर। जेल में फिल्मों की तर्ज पर कैदियों की उनके परिजनों से मुलाकात व बात कराई जा रही है। इंटरकॉम के जरिये दूर से बैठकर वे एक दूसरे से बात कर रहे हैं। इसके लिए बकायदा इंटरकाम सिस्टम से मुलाकात की व्यवस्था शुरू की गई है। दरअसल, यह बदलाव कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जेल प्रशासन ने किया है।इसका मकसद है कि किसी बंदी से मिलने आए उसके परिजन से जेल में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। बताते चलें कि गोरखपुर जेल में इस समय करीब 2300 बंदी हैं। अगर जेल के अंदर कोरोना फैलता है, तो इन बंदियों को संभाल पाना मुश्किल होगा। जेलर प्रेम सागर शुक्ला ने बताया कि इस सुविधा को शुरू करने में ज्यादा खर्च नहीं आया है। फोन लाइन पहले से ही जेल में थी। सिर्फ एक फोन सेट लगाया गया है।मंगलवार को एक बंदी की इंटरकाम से मुलाकात और बात कराई गई। वहीं, बुधवार की सुबह से दोपहर तक करीब 10 बंदियों की मुलाकात इस सिस्टम से हुई।

इसके तहत कोविड से बचाव के नियमों का पालन कराते हुए मुलाकातियों को जेल के ऑफिस के एक कमरे में बैठाया जा रहा है। वहीं बंदी को जेल के अंदर एक दूसरे कमरे में बैठाया जा रहा है। इसके बाद वे टेलीफोन से बात कर रहे हैं। बीच में लगी एक खिड़की के जरिये वे एक दूसरे को देख सकते हैं।ओमिक्रॉन संक्रमण के चलते बंद हुई व्यक्तिगत मुलाकातओ मिक्रॉन के संक्रमण को देखते हुए तीसरी लहर की आशंका पर तीन दिन पूर्व ही जेल में बंदियों की व्यक्तिगत मुलाकात पर पाबंदी लगा ​दी गई है। वहीं, अस्थायी जेल की व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है। जहां जेल आने पर पहले बंदी को रखा जाएगा और उसकी कोविड जांच के बाद निगेटिव आने पर ही मुख्य जेल में ले जाया जाएगा।बताते चलें कि इससे पहले जेल प्रशासन ने कैदियों के लिए पीसीओ सुविधा शुरू की थी। इसके तहत कैदियों से उनके घर के फोन नंबर मांगे गए थे। पीसीओ के लिए 100 बंदी रजिस्टर्ड हैं। इनकी बात पीसीओ से इनके परिजनों से कराई जा रही है।

इसके लिए बंदी का नाम पता लिखकर उसके परिजन को जेल प्रशासन को एप्लीकेशन देनी पड़ती है। बाद में जेल प्रशासन वैरिफिकेशन कराकर बात कराता है। इस सुविधा में कैदियों को परिजनों के अलावा दोस्तों या रिश्तेदारों से बात करने के लिए उनके नंबर देने की इजाजत नहीं थी।वहीं, बंदियों का सामान जेल के बाहर ही जमा कराया जा रहा है। जिसे क्वांरटीन करने के बाद संबंधित बंदी तक पहुंचाया जा रहा है। जेलर प्रेम सागर शुक्ला ने बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए हर संभव कदम हमारे द्वारा उठाए जा रहे हैं। सुरक्षा की इसी कड़ी में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए इंटरकाम से बंदियों की बात कराने की व्यवस्था की गई है।