गायत्री की अब लंबी जेल यात्रा, जानें किस तरह शुरू किया अपना राजनीतिक सफर

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सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे गायत्री प्रजापति का जलवा हमेशा से बरकरार था। वो जो चाहते थे वही होता। उन्होंने कम समय में करोड़ों की संपत्ति पैदा कर ली थी। यहां तक कि तब के CM अखिलेश यादव की नाराजगी के बाद भी उनको मंत्री पद से नहीं हटाया गया था। गायत्री प्रजापति के तरक्की की रफ्तार अचानक इतनी तेज हुई कि जेल पहुंचकर ठहरी। अब जेल की रोटी खा रहे हैं। शुक्रवार को उन्हें गैंगरेप के आरोप में उम्रकैद हो गई।

इस तरह शुरू किया राजनीतिक सफर
गायत्री प्रसाद प्रजापति की समृद्धि का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। गायत्री के आर्थिक रूप से मजबूत होने का सिलसिला साल 2000 के बाद शुरू हुआ। 1993 में राजनीति से जुड़कर गायत्री प्रजापति 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर आए। 2013 में अखिलेश यादव सरकार में उन्हें सिंचाई राज्यमंत्री बनाया गया। थोड़े दिनों बाद इन्हें खनन विभाग भी दिया गया। बताया जा रहा है कि उनको 3 बार चुनाव हारने के बाद भी टिकट दिया गया।

2016 में खनन विभाग के कैबिनेट मंत्री बने
इसके बाद उन्हें स्वतंत्र प्रभार दिया गया। 2016 में उन्हें खनन विभाग का ही कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। पहली बार मंत्री बनने के साथ ही गायत्री के खिलाफ शिकायतें भी CM कार्यालय तक पहुंचनी शुरू हो गई थी, लेकिन इन्हें नजर अंदाज किया जाता रहा। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के करीबियों में गिने जाने वाले गायत्री ने इसका खूब फायदा उठाया। वह अवैध खनन से होने वाली काली कमाई दोनों हाथों से बंटोरते रहे। गायत्री का रुतबा इतना बढ़ गया कि मंत्रिमंडल में भी लोग उनसे सिफारिशें लगाते थे।

1996 में भी उन्होंने किस्मत आजमाई सफल नहीं हुए
गायत्री प्रजापति पहली बार अमेठी से 1993 में चुनाव लड़े और हार गए। 1996 में भी उन्होंने किस्मत आजमाई सफल नहीं हुए। 2002 में यादव परिवार से रिश्तों के चलते उन्हें फिर टिकट मिला। लेकिन, जीत नहीं मिली। यह देखते हुए 2007 में उन्हें टिकट नहीं दिया गया। फिर 2012 चुनाव में टिकट हासिल करने में कामयाब रहे और जीत भी दर्ज कराई।

CBI जांच के साथ हुई बर्खास्तगी, फिर बन गए मंत्री
2016 में कोर्ट ने अवैध खनन के एक मामले में गायत्री के खिलाफ CBI जांच के आदेश दे दिए। इसके बाद तत्कालीन CM अखिलेश यादव ने उन्हें बर्खास्त कर दिया, लेकिन सपा संरक्षक मुलायम से करीबियां काम आईं और उनकी पैरवी पर गायत्री दोबारा कैबिनेट में आ गए। इसी बीच गायत्री के खिलाफ चित्रकूट की महिला सभासद ने खुद के और अपनी नाबालिग बेटी से रेप का आरोप लगाया। जिसमें आज उन्हें सजा मिली।

गायत्री के एक खास अफसर को मुख्य सचिव की कुर्सी मिली
भ्रष्टाचार की जानकारी की वजह से तत्कालीन CM अखिलेश यादव ने उन्हें कभी पसंद नहीं किया। हालांकि, परिवार के भीतर जड़ बनाए गायत्री के खिलाफ कभी सख्त कदम भी नहीं उठा पाए। गायत्री के एक खास अफसर को मुख्य सचिव की कुर्सी मिली तो चर्चा शुरू हुई कि गायत्री के भ्रष्टाचार को दबाए रखने के लिए उन्हें चार्ज मिला है। हालांकि इसकी भनक लगते ही अखिलेश यादव ने उस अफसर को पद से हटा दिया था।

फॉर्च्यूनर में बैठाकर पुलिस ले गई थी जेल
गायत्री प्रजापति का रुतबा सलाखों के पीछे पहुंचने तक बना रहा। 16 मार्च 2017 को उन्हें गिरफ्तार कर हजरतगंज कोतवाली में लाया गया तो पुलिस यहां भी VIP खातिरदारी में जुटी रही। मीडिया को बाहर रोककर एसपी पूर्वी के कार्यालय में उन्हें चाय नाश्ता कराया गया। वैसे, कार्यालय से बाहर निकलते ही जब CO ने उन्हें जेल ले जाने के लिए फॉर्च्यूनर कार में बैठाया तो पोल खुल गई। मामले में किरकिरी होते देख तत्कालीन SSP मंजिल सैनी ने CO पर नाराजगी जताई।