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क्या भाजपा के तिलिस्म को तोड़ पाएगी सपा? हर तरफ लग रहा जीत-हार का आंकड़ा

 

वर्ष 2017 के मुकाबले 2022 में विधानसभा लहरपुर में बढ़ा 0.3 प्रतिशत मतदान

सीतापुर। कहा जाता है कि जितना अधिक मतदान प्रतिशत होगा भाजपा की जीत का ग्राफ उतनी ही तेजी से बढ़ता है तो क्या इस बार के घटे मतदान से यह मान लिया जाए कि भाजपा के तिलिस्म को सपा तोड़ देगी अथवा ये माना जाय कि सीतापुर जिले में जिस तरह से भाजपा ने बीते 2017 में सात सीटों पर प्रदर्शन किया था वो बरकरार रख पाएगी या नहीं।

बताते चले कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में 68.60 प्रतिशत का मतदान हुआ था। तब भाजपा ने जिले में सात सीटों पर कब्जा किया था जिसमे विधानसभा सीतापुर, महोली, हरगांव, लहरपुर, बिसवां, मिश्रिख तथा सेउता शामिल थी। जबकि दो सीटों सिंधौली में बसपा व महमूदाबाद में सपा का परचम लहराया था।

अब राजनैतिक गणितज्ञो की बात की तरफ गौर किया जाय तो कहा जाता है कि जितना अधिक मतदान प्रतिशत होता है उतना ही भाजपा लीड करती है अगर इस बात की तरफ ध्यान दिया जाए तो मतदान प्रतिशत बीते विधानसभा 2017 से इस बार 2.24 प्रतिशत का नुकसान हुआ है तो क्या ये माना जाय कि सीतापुर में भाजपा अपनी जीती सभी सात सीटे बरकरार रखने में नाकाम रहेगी। बता दें कि वर्ष 2017 में भाजपा ने जहां जहां जीत दर्ज की थी वहां-वहां इस बार मतदान प्रतिशत घटा है। अगर हम बात करें विधानसभा महोली की तो वहां बीते 2017 विधानसभा चुनाव में हुए मतदान की अपेक्षा इस वर्ष 2022 में 2.80 प्रतिशत कम मतदान का नुकसान हुआ है। इसी तरह से विधानसभा सीतापुर में 2017 के मुकाबले इस वर्ष 3.73 प्रतिशत का मतदान प्रतिशत घटा है। हरगांव विधानसभा में वर्ष 2017 के मुकाबले इस वर्ष 3.54 प्रतिशत मतदान कम हुआ है।

विधानसभा बिसवां में वर्ष 2017 के मुकाबले इस वर्ष 1.92 प्रतिशत मतदान घटा है। वहीं सेउता विधानसभा में वर्ष 2017 के मुकाबले 1.29 प्रतिशत कम मतदान हुआ है। विधानसभा मिश्रिख में वर्ष 2017 के मुकाबले इस वर्ष 2.19 प्रतिशत का नुकसान हुआ है। यहां पर एक बात और विधानसभा लहरपुर ऐसी विधानसभा है जहां पर वर्ष 2017 के मुकाबले 0.3 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई है। यहां पर भी भाजपा ही जीती थी। वहीं महमूदाबाद में सपा जीती थी जहां पर वर्ष 2017 के मुकाबले इस वर्ष 2.90 प्रतिशत मतदान घटा है जबकि सिधाली की बात करें तो वहां बसपा जीती थी और वर्ष 2017 के मुकाबले इस वर्ष 2.16 प्रतिशत मतदान कम हुआ है।

हर तरफ लग रहा जीत-हार का आंकड़ा
चौथे चरण में हुए मतदान के चुनाव को संपन्न हुए 72 घंटा बीत चुके है। जिले की नौ विधानसभाओं के 96 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मतदाता ईवीएम के कैद कर चुके है। अब जिले के चौराहों, नुक्कडत्रों पर पान की दुकानों पर तथा गली मोहल्लों में सिर्फ एक ही चर्चा है कि कौन प्रत्याशी जीतेगा और कौन हारेगा। गलियों व नुक्कड़ो के गणितज्ञों में पहले बाते होती हैं और फिर वह बहस का रूप ले लती है। यहां तक कि किस जाति का वोट किस प्रत्याशी को मिलेगा यहां तक के आंकड़े खोल कर रख जा रहे है। कुल मिलाकर जिले की नौ विधानसभा सीटो पर कोई सपा को तो कोई सभी सीटें भाजपा की होना बताता है। कौन जीतेगा कौन हारेगा किसके सिर पर जीत का ताज होगा यह आने वाले दस मार्च को पता ही लग जाएगा।

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