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कोरोना ही नहीं इस घातक बीमारी से भी बचाएगा मास्क, जानें- एक्सपर्ट्स की राय

लखनऊ. आज पूरा विश्व कोरोना से जूझ रहा है और उससे बचने के लिए मास्क का उपयोग कर रहा है लेकिन ये मास्क ना केवल कोरोना वायरस बल्कि टी.बी. जैसी अन्य बीमारियों से भी आपको बचा सकता है। गुरूवार 12 अगस्त 2021 को ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज द्वारा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन हुआ जिसमे एक्सपर्ट्स ने बताया मास्क का फायदा जो टी.बी. और अन्य बीमारियों से आपकी सुरक्षा करेगा। इस मौके पर चिकित्सा एवं स्वास्थ मंत्री श्री जय प्रताप सिंह मुख्य अतिथि मौजूद थे।

डॉ. सूर्य कांत(चेयरमैन स्टेट टास्क फाॅर्स, NTEP) बताते हैं की सन् 1882 में टी.बी. के बारे में पता चला और 1993 में डब्लू एच ओ द्वारा इसे ग्लोबल इमरजेंसी घोषित किया गया। लेकिन आज भी पूरा विश्व इस बीमारी से जूझ रहा है। हर साल भारत में करीब 27 लाख नए टी.बी. के मरीज़ मिलते हैं और रोज़ाना 6000 नए केस सामने आते हैं लेकिन फिर भी इसको लेकर उतनी जागरूकता नहीं है, और इसका कारण है इससे जुडी गलत धारणा। लोग टी.बी. के मरीज़ के साथ भेद-भाव करते हैं, उन्हें दूसरी निगाह से देखते हैं और कई बार इस डर से लोग बीमार होने के बावजूद अस्पताल नहीं जाते अपना इलाज कराने। ऐसे में जरूरी हो जाता है लोगों को इसके बारे में बताना और जागरूकता फैलाना।

डॉ. की माने तो कोरोना काल में टी.बी. के मरीज़ों को लेकर जागरूकता फैली है। मास्क पहनने से न केवल कोरोना से सुरक्षा मिलती है बल्कि टी.बी. और अस्थमा जैसी कई सांस से जुडी बीमारियों के फैलने का खतरा काम होता है। उन्होंने “मास्क एक, फायदे अनेक” का नारा देते हुए कहा की लोगों को मास्क का उपयोग करना चाहिए ताकि ये बीमारियों का चेन टूटे। लेकिन इन सब के साथ ये बात भी ध्यान रखने वाली है की टी.बी. के मरीज़ों के साथ कोई भेद-भाव न हो। टी.बी. छूने, हाथ मिलाने, साथ खाने और पीने से नहीं फैलता, ये फैलता है छींकने और खांसने से। ऐसे में ज़रूरी हो जाता है सारे रिस्क फैक्टर को समझ के उसपर काम करने की।

टी.बी. होने का खतरा कुपोषित बच्चो-बड़ों और एनीमिया ग्रसित महिलाओं में सबसे अधिक होता है। इसके आलावा जो नशा करते हैं उनमें भी टी.बी. होने का खतरा बना रहता है। जो लोग फैक्ट्री, ईंट की भट्टी और निर्माण कार्य में लगे रहते हैं उनके फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और टी.बी. के बैक्टीरिया उन्हें आसानी से बीमार कर सकते हैं। जिन महिलाओं का विवाह काम उम्र में हो जाता है या जो उम्र में ही माँ बन जाती हैं उन्हें भी टी.बी. जैसी बीमारियां होने का खतरा रहता है।

डॉ बताते हैं की अगर 5 मिनट भी धूप की रौशनी में रहे तो वो टी.बी. के बैक्टीरिया को मारने और रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने में सहायता करता है। डॉ ज्योति सक्सेना ने बताया की टी.बी. का इलाज संभव है बस मरीजों को चाहिए की वो दवा का कोर्स पूरा करे और अपने खान-पान का ध्यान रखे। इसके लिए सरकार कई योजनाएं भी चला रही है जैसे की ‘दस्तक योजना’, जिसके अंतर्गत आशा बहने घर घर जाकर मरीज़ो का टेस्ट कर रही हैं। सरकार जरूरतमंदों को हर महीने 500 रूपये भी दे रही है ताकि वो अपनी दवाएं खरीद सके और अपना इलाज पूरा कर सके। सरकार की योजनाएं और मीडिया की जागरूकता फैलाने से भारत जल्द ही टी.बी. मुक्त हो सकता है, ज़रूरत है तो बस पॉजिटिव एप्रोच की।

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