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कैसे लगी कचरे में आग………..जो 60 सालों से नहीं बुझी, आखिर ये शहर है कहां?

फ्लोरिडा (ईएमएस)। क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा शहर भी है, जो पिछले 60 सालों से लगातार जल रहा है? एक बड़ी चूक की वजह से आज ये शहर भूतिया बन गया है… क्योंकि अब यहां कोई नहीं रहता। जब शहर की हवा में जहर घुलने लगा, तब यकीनन लोग अपना घर छोड़कर चले गए। इस शहर तक जाने वाली सड़कों पर मिट्टी के ढेर डाल दिए गए जिससे यहां टूरिस्ट न जा सकें। यहां के पोस्टल जिप कोड को भी खत्म कर दिया गया, आग बुझाने की काफी कोशिशें की गईं, मगर सारी कोशिशें नाकाम साबित हुईं। आखिर ये शहर है कहां?

बात कर रहे हैं अमेरिका के पेंसिलवेनिया में स्थित सेंट्रेलिया नाम के एक छोटे से शहर की। सेंट्रेलिया के जलने की शुरुआत होती है 1962 गर्मियों में, जब ये शहर देश के मेमोरियल डे की तैयारी कर रहा था। अमेरिका में अपने दिवंगत सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए मई के आखिरी सोमवार को मेमोरियल डे मनाया जाता है। मई 1962 में भी ऐसा ही होना था। सेंट्रेलिया में मेमोरियल डे से पहले शहर के सारे कचरे को एक बड़े लैंडफिल, यानी कचरे के लिए बने गड्ढे में डालकर जला दिया जाता था। उस साल भी ऐसा ही होना था।

कचरे को आग लगाई गई, पर एक बड़ी चूक हो गई। इस चूक में आग नीचे मौजूद कोयले की खदान में फैल गई। सेंट्रेलिया शहर बहुत बड़े कोयले की खदान पर बना है। ये खदानें जाल की तरह फैली हैं जो करीब 700 फीट की गहराई तक जाती हैं और हजारों एकड़ में फैली हैं। एक जगह पर आग लगने से खदानों में आग बढ़ती गई और देखते-देखते एक बड़े हिस्से को कवर कर लिया। ये आग 27 मई 1962 की रात लगाई गई थी। शुरू में आग बुझ गई। पर 2 दिन बाद दोबारा कूड़े वाली जगह पर आग जलती दिखाई दी। फिर 4 जून को दोबारा आग जलती हुई दिखाई दे गई। धीरे-धीरे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस हवा में फैलने लगी जो बेहद जानलेवा होती है।

खदान सुस्क्वेहैना कोल कंपनी की थी। कंपनी के साथ अमेरिकी सरकार ने मिलकर आग बुझाने की कई कोशिशें कीं। सबसे पहले गड्ढे खोदने का फैसला लिया गया, जिससे आग ऊपर आ जाए और उस बुझाया जा सके, पर इसके लिए बहुत ज्यादा खुदाई करनी पड़ती और उतना फंड था नहीं। इसके बाद दूसरा प्लान ये बना कि पानी और छोटे पत्थरों को मिलाकर गड्ढों में भरा जाए, जिससे अंदर की आग बुझ जाए, पर तापमान काफी कम होने की वजह से पानी जमने लगा। 1983 तक पेंसिलवेनिया प्रशासन ने 58 करोड़ रुपये आग बुझाने के काम में खर्च कर दिए थे, पर सफलता नहीं मिली।

लगातार धुआं निकलने की वजह से लोग घरों में बेहोश होने लगे, आसपास के पेड़-पौधे सूखने लगे। जानवर भी मरने लगे। साल 1980 तक शहर की आबादी 1000 तक हो गई थी। हालांकि, लोगों ने धीरे-धीरे धुएं के साथ जीना सीख लिया था। 1983 में फेडरल सरकार ने 350 करोड़ रुपये देकर सेंट्रेलिया को खरीद लिया और उसके बाद वहां से लोगों को हटाने और इमारतों को गिराने का काम शुरू किया। कई लोग अपना घर छोड़कर नहीं जाना चाहते थे। उन्होंने सरकार से कानूनी लड़ाई शुरू कर दी। 1993 तक वहां पर 63 लोग बचे थे। जबकि 2013 तक 10 से भी कम लोग रह गए थे। अब शहर पूरी तरह सुनसान हो चुका है। माना जा रहा है कि शहर के नीचे इतना कोयला है कि अगले 250 सालों तक जलता रहेगा।

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