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कुदरत का कहर : हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी में बारिश, बाढ़ का कहर, नदियों का रौद्र रूप, हजारों पर्यटक फंसे

36 घंटें में 200 से ज्यादा मौतें
-यमुना के जलस्तर ने तोड़ा 45 साल का रिकॉर्ड, सीएम ने गृहमंत्री को लिखी चिटठी


नई दिल्ली(ईएमएस)। उत्तर भारत सहित पहाड़ी राज्यों में कुदरत ने अपना क्रोधित रूप दिखाया है। भारी बारिश के चलते उफनती नदियां अपने तटबंध तोडक़र घरों में प्रवेश कर गई हैं। विशेषकर पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के चलते सैकड़ों लोगों की जान गई है। हिमाचल प्रदेश में अब तक 85 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, वहीं उत्तराखंड में दो दिन में 35 लोगों की मौत हो गई। यहां भारी बारिश के चलते केदारनाथ यात्रा रोक दी गई है। उधर, पंजाब में 8 और हरियाणा में 7 लोगों के मरने का समाचार है। उत्तरप्रदेश और बिहार में भी बारिश व बिजली गिरने की घटनाओं में 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। दिल्ली में यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और यह शाम तक खतरे के निशान से ऊपर पहुंच जाएगा।


दिल्ली समेत उत्तर-भारत के अधिकांश राज्यों में बीते सप्ताह मानसून की बारिश आफत बनकर बरसी। दिल्लीवालों की मुसीबतें बढऩे के पूरे आसार हैं क्योंकि बारिश का थमा हुआ सिलसिला फिर शुरू होने वाला है और हरियाणा का पानी यमुना जलस्तर बढ़ा रहा है। दिल्ली-एनसीआर में इस सप्ताह भी बारिश होगी और 15-16 तारीख के लिए बारिश का यलो अलर्ट है। यमुना के बढ़ते जलस्तर ने 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बुधवार दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 207.55 मीटर तक जा पहुंचा। इससे पहले 1978 में नदी का जलस्तर 207.49 मीटर तक पहुंचा था।

दिल्ली खतरे में, यमुना पहुंची घरों तक

हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी के कारण दिल्ली में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। उधर यमुना के निकट बाजारों और घरों में पानी घुस गया। सुबह यमुना के लोहे के पुल पर वाटर लेवल 207.25 मीटर दर्ज किया गया। यमुना के निकट रहने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है। उधर हिमाचलप्रदेश में आज भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अब तक हुई बारिश ने राज्य को बुरी तरह तबाह कर दिया है। यहां 400 से अधिक छोटे-बड़े घर नष्ट हो गए, वहीं 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले 3 दिनों से बादल फटने की घटना के कारण उफनती नदियों की चपेट में आकर 29 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उधर उत्तरप्रदेश में भी भारी बारिश के चलते पश्चिमी हिस्सा पूरी तरह जलमग्न हो गया।

चार राज्यों में सभी शैक्षणिक संस्थाएं बंद

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा में हो रही जबरदस्त बारिश के चलते यहां के वर्षा प्रभावित इलाकों में सभी शैक्षणिक संस्थाएं बंद कर दी गई हैं।

व्यास नदी में समाए कई ट्रक

हिमाचल प्रदेश की क्रोधित व्यास नदी ने यहां भारी तबाही मचा दी है। कुल्लू में उफनती नदी ने ट्रक यूनियन के दफ्तर के बाहर पार्किंग में खड़े कई ट्रक व अन्य वाहनों को भी चपेट में ले लिया।

सभी धार्मिक यात्राएं रोकीं
बिगड़ता मौसम आस्था पर भारी पड़ रहा है। जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के बाद अमरनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा को रोक दिया गया है। यहां हजारों लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाने के लिए सेना की मदद ली जा रही है।

उज्जैन में शिप्रा का पानी मंदिरों में घुसा

बीना नदी उफनाने से खेत डूबे, नर्मदा-पार्वती का भी जलस्तर बढ़ा मध्यप्रदेश में बारिश का सिस्टम एक्टिव है। राजधानी भोपाल में मंगलवार रात से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। पूरा प्रदेश तरबतर है। बुधवार को सीहोर, राजगढ़, रायसेन और शाजापुर में अति भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। यहां 24 घंटे में 8 इंच तक बारिश हो सकती है। भोपाल, जबलपुर समेत प्रदेश के 16 जिलों में हैवी रेन का अलर्ट है।
सीनियर मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे ने बताया कि प्रदेश में बुधवार को भी बारिश की एक्टिविटी ज्यादा रहेगी। नार्थ ईस्ट राजस्थान के ऊपर कम दवाब का क्षेत्र बना हुआ है, जो उत्तरी मध्यप्रदेश से होकर पूर्व की ओर बढ़ रहा है। वहीं, ट्रफ लाइन एक्टिव है। इस कारण बारिश हो रही है।

रायसेन के बेगमगंज इलाके में लगातार हो रही बारिश से बीना नदी उफान पर आ गई है। कोकलपुर गांव में 150 एकड़ खेत डूब गए। बड़वानी में नर्मदा का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। श्योपुर में पार्वती नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। उज्जैन में बुधवार सुबह शिप्रा नदी का पानी रामघाट पर पहुंच गया। घाट के कई मंदिर डूब गए। छोटे रपटे के ऊपर से शिप्रा का पानी बह रहा है। बैतूल जिले में लगातार हो रही बारिश के बाद डैम में पानी की आवक तेज हो गई है। बुधवार को पारसडोह के दो गेट और सारणी स्थित सतपुड़ा बांध का एक गेट खोला गया है।

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