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कानपुर : प्रचंड गर्मी से हैलट ओपीडी में उल्टी-दस्त व बुखार से पीडितो मरीजो की संख्या बढ़ी

कानपुर।शहर में उमस भरी प्रचंड गर्मी से उल्टी-दस्त, बुखार, खांसी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। पिछले 72 घंटों से मौसम ने हीट स्ट्रोक, उल्टी दस्त और बुखार के कई मरीज हैलट और उर्सला अस्पताल में बड़ी संख्या में पहुंच रहे है। गुरुवार 12 बजे तक अस्पतालों में बने ओपीडी में करीब 55 से अधिक मरीज इन्हीं शिकायतों की वजह से आए। इनमे से 23 मरीजों को भर्ती करना पड़ा है। साथ ही आसपास के जिलों से रेफर के भी कई मरीज हैलट पहुंचे। रसूलाबाद सीएचसी में गुरुवार को सुबह 11 बजे तक तीन मरीजों को भेजा गया। वहीं ओपीडी में इस दौरान कई डॉक्टर भी कमरों में नदारद दिखे, जिसकी वजह से मरीजों को इंतजार करना पड़ा।

– बच्चे व तीन की हीट स्ट्रोक से मौत
चिलचिलाती धूप व गर्म हवाओं से हीट स्ट्रोक के बढे मरीजों में उल्टी, दस्त, तेज बुखार जैसी शिकायतों होने पर मरीजों को भर्ती किया जा रहे है।पिछले 48 घंटे में एक बच्चे और तीन अन्य लोगों की मौत हीट स्ट्रोक से हो चुकी है। मेडिसिन ओपीडी की डॉ रिचा गिरी ने बताया, मनुष्य का शरीर 40 से 45 डिग्री तक तापमान झेल सकता है लेकिन वो भी रोजाना नहीं। जिस तरह से गर्मी पड़ रही है उसे देखते हुए लोग अपनी सेहत का ख्याल नहीं रख पा रहे है। लोग भूखे पेट काम के लिए घर से निकल रहे है। रात का रखा हुआ खाना खा रहे है। साथ ही पानी का इन्टेक कम हो रहा है। इन्हीं सब बातों के चलते मरीजों की संख्या बढ़ रही है। आने वाले समय में अगर मौसम ऐसा ही रहा तो दिक्कते और बढ़ सकती है।

– 12 सालों का रिकॉर्ड टुटा
सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डॉ एसएन पांडेय का कहना है कि इस बार प्री मानसून की बारिश न होने की वजह से पिछले 12 सालों का रिकॉर्ड टूटा है। ऐसे में अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ना लाजमी है। मनुष्य के शरीर में तापमान झेलने की क्षमता होती है। लेकिन इस बार बारिश न होने के कारण दिक्कतें बढ़ गई है। हीट वेव की वजह से लोग ज्यादा बीमार पड़ रहे है। अभी एक हफ्ता ऐसा ही रहने वाला है।

– ग्रामीण इलाकों के ज्यादा मरीज
ओपीडी में बैठने वाले ज्यादातर डॉक्टरों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों से ज्यादा मरीज आ रहे है। हैलट अस्पताल के सीएमएस डॉ आरके मौर्य ने बताया कि ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी के चलते मरीजों को अच्छे इलाज न मिल पाने के चलते, उन्हें हैलट रेफर कर दिया जाता है। हम लोग 15 से 17 जिलों के मरीजों का इलाज करते है। साथ ही उन सीरियस मरीजों को भी देखने पड़ता है जिन्हे निजी अस्पताल वाले रेफर कर देते है।

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