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कई बड़ों के गले की फांस बन सकता है श्वेता की मौत का मामला, एसपी बाेले-जरूरत पड़ी तो…

वायरल ऑडियो-वीडियो के आधार पर आगे बढ़ रही पुलिस की जांच

एसपी बाेले-जरूरत पड़ी तो जल्द ही राजधानी लखनऊ पहुंचेगी टीम

बांदा। भाजपा नेत्री और जिला पंचायत सदस्य श्वेता सिंह गौर की संदिग्ध मौत का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। मामले की परतें जिस तरह से खुलती जा रही हैं, उसके हिसाब से जांच की आंच में कई बड़ों और रसूखदारों तक पहुंचने की आशंका है। हालांकि अभी पुलिस मामले में कुछ खुलकर नहीं बोल रही है, लेकिन पुलिस अधीक्षक का साफ कहना है कि सोशल मीडिया मंे वायरल हो रहे ऑडियो-वीडियो के साथ ही फेसबुक पोस्टों के आधार उनकी जांच आगे बढ़ रही है और जरूरत पड़ी तो पुलिस की टीमें राजधानी के उन होटलों में भी दस्तक दे सकती है, जिनका जिक्र वायरल ऑडियो में किया जा रहा है। देखना यह होगा कि पुलिस की जांच की आंच में कौन-कौन झुलसता है और कौन पाक साफ साबित होता है।

शहर के इंदिरा नगर मोहल्ले में बीती 27 अप्रैल को जिला पंचायत सदस्य श्वेता सिंह गौर का शव पंखे से लटकता हुआ पाया गया था, जिसे लेकर श्वेता के पिता और भाई ने श्वेता के पति दीपक समेत रिटायर्ड डीआईजी राजबहादुर सिंह, सास और जेठ को जिम्मेदार ठहराते हुए हत्या, दहेज उत्पीड़न की वििभन्न धाराओं मंे मुकदमा दर्ज करा दिया था। परिजनों के बढ़ते दबाव के चलते पुलिस ने घटना के तीन दिन बाद पति की नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी दिखा कर उसे जेल भेज दिया। पति के जेल जाने से ऐसा लगा था कि अब मामला शांत हो जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। उधर श्वेता के भाइयों ने आडियो-वीडियो की ऐसी सीरीज मीडिया और पुलिस तक पहुंचाई कि जहां मामले में भूचाल आ गया, वहीं शहर के लोग पूरे मामले को सियासत से जोड़ते हुए मजे लेने लगे। सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो-वीडियो में श्वेता-दीपक के बीच तकरार और दीपक की अय्यासी की कड़ियां मिलने लगीं। चर्चा है कि अगर इस मामले की गहनता से जांच हुई तो कई बड़े भी जांच की आंच में झुलस सकते हैं। हालांकि पुलिस ने भी सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो-वीडियो के आधार पर जांच तेज कर दिया। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने मीडिया को बताया है कि मामले की जांच अभी चल रही है, सोशल मीडिया पोस्ट और काॅल रिकार्डिंग के आधार पर पड़ताल की जा रही है। साइबर सेल और विवेचक के बीच चल रही जांच की पिक्चर साफ होते ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। कहा है कि जहां जहां भी मामले से संबंधित सुराग मिलेंगे, पुलिस टीम वहां जाएगी और पूरे मामले को दूध का दूध और पानी का पानी करेगी।

राजेश मामा और लाला पर भी कसेगा शिकंजा

श्वेता-दीपक की तकरार वाले वीडियो मंे श्वेता किसी राजेश मामा के घर में आने का विरोध करती दिखाई देती है, इसी बात को लेकर दोनों की बात बिगड़ती दिखती है। पुलिस भी कथित राजेश मामा की भूमिका की जांच कर रही है और साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई का दावा करती है। उधर एक ऑडियो में किसी लाला नाम के सख्श का भी जिक्र है, जिस पर भी जांच की आंच पड़ सकती है। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन का कहना है कि राजेश और लाला का मामले में कितना और कैसा रोल है, इसकी जांच चल रही है। साक्ष्य मिलते ही दोनों पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले में राजेश मामा की भूमिका को लेकर श्वेता के भाई शुभम सिंह से भी पूछताछ की गई है और भाई ने राजेश की हरकतों का खुलासा भी पुलिस के सामने किया है। अब पुलिस को पुख्ता सबूतों का इंतजार है, सबूत मिलते ही राजेश और लाला भी कार्रवाई की जद में आएंगे।

बेटियों के नाम प्रापर्टी करने को लेकर चल रही कवायद

जिला पंचायत सदस्य श्वेता सिंह गौर की संदिग्ध मौत और पति के जेल जाने के बाद अब सामाजिक दबाव और बेटियों के भविष्य की चिंता को लेकर समझौते की कवायद तेज हो गई है। सूत्र बताते हैं कि दीपक के हिस्से की आधी प्रापर्टी के साथ ही तीनों बेटियों के नाम दस-दस लाख रुपए जमा होने की बात पर लगभग पारिवारिक मुहर लग चुकी है, अब इसे सरकारी जामा पहनाना बाकी रहा गया है। वहीं मुकदमे के वादी और श्वेता के भाई आेंकार सिंह का रुख भी ससुर, सास और जेठ को लेकर नरम होने लगा है। उसने भी दबी जबान कहा है कि घटना के बाद गुस्से में आकर उन्होंने सभी को आरोपी बना दिया था, लेकिन अब हकीकत पता चल रही है कि मामले में सिर्फ दीपक की दोषी है। जबकि ससुर पूर्व आईपीएस राजबहादुर, जेठ धनंजय और सास पुष्पा मौके पर नहीं थे। इस संबंध में भी शपथ पत्र देकर उन्हें बाहर कराने का प्रयास किया जाएगा। श्वेता के भाई का कहना है कि मां की मौत और पिता के जेल जाने के बाद तीनों बेटियों अदिति उर्फ बिट्‌टो, अविका उर्फ गौरी व अविष्का उर्फ बब्बू का भविष्य सुरक्षित करना उनकी भी पहली प्राथमिकता है। पारिवारिक लोग बताते हैं कि समाज के लोगों ने मायके व ससुराल पक्ष के बीच सुलह कराई है। हालांकि अभी कोर्ट में शपथ पत्र नहीं दिए गए हैं।

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