उन्नाव : पुरवा में आजतक न खिल पाया ‘कमल’, पढ़िए पूरी खबर



  17 विधानसभा चुनावों में एक बार भी भाजपा नही जीती

उन्नाव । सूबे में कई बार सरकार बना चुकी भाजपा जिले की एक विधानसभा सीट में अपना परचम फहराने को बेताब है। वजह में भाजपा की प्रचंड लहर के बाद भी आज तक यहां एक भी बार कमल।के फूल का न खिलना है। भाजपा के विधायक वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित यहाँ से चार बार विधायक रहे पर उस दरम्यान उनके हाथों में कमल नही रहा। बीते चुनावों में उन्होंने निकटवर्ती भगवंतनगर सीट से विजयश्री हासिल की थी। यहां से भाजपा का परचम फहराने में वो भी नाकाम ही रहे। अब एक बार फिर विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। कोरोना गाइडलाइन के साथ डिजिटल प्रचार भी सोशल मीडिया पर छाया है।

उन्नाव की राजनीति में वर्ष 2012 में सपा का बोलबाला था तो 2017 में भाजपा ने पांच सीटो पर जीत हासिल की थी। पुरवा की एकमात्र सीट ऐसी थी जिस पर मोदी लहर में भी बसपा के टिकट पर अनिल सिंह ने जीत हासिल कर उदयराज यादव की जीत का सिलसिला तोड़ा था। हालांकि बसपा से जीत के बाद पार्टी से विद्रोह कर अनिल सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इस बार भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने अनिल सिंह को टिकट देकर पुरवा विधानसभा में अपना खाता खोलने का प्लेटफार्म तैयार कर लिया है। पुरवा विधानसभा क्षेत्र भाजपा के लिए चुनौती बना है। अब तक 17 चुनाव हो चुके हैं लेकिन भाजपा का जीत का खाता नहीं खुला है। इस बार भी भाजपा के लिए यहां कमल खिलाने की बड़ी चुनौती है।

अभी तक पुरवा विधानसभा सीट पर कांग्रेस व सपा को यहां की जनता ने बराबर-बराबर मौका दिया। कांग्रेस और सपा ने पांच-पांच बार अर्थात 25-25 साल तक इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा। बीच के कुछ चुनावों में निर्दलीय और जनता दल ने कब्जा किया। हालांकि इस हॉट सीट पर भाजपा कई चुनाव में रनर रहीं लेकिन जीत का खाता आज तक नहीं खोल पाई।
उदयराज यादव सपा से रहे लगातार पांच बार विधायक
समाजवार्दी पार्टी के गठन के बाद से ही पुरवा विधानसभा सीट पर सपा ने जीत का सिलसिला शुरू करते हुए लगातार पांच चुनावों में जीत हासिल की। सपा के लिए जिले में सबसे मजबूत सीटों में पुरवा शुमार की जाती है। यहां से सपा नेता उयराज यादव ने एकछत्र राज किया। हालांकि पुरवा को कभी कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई।

निर्दलीयों को भी पुरवा की जनता का समर्थन
पुरवा विधानसभा क्षेत्र के लउवासिंहखेड़ा ग्राम पंचायत ने इस विधानसभा को आठ बार विधायक भी दिया। इनमें हृदय नारायण दीक्षित और उदयराज यादव चार बार विधायक चुने गए। वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष और भगवंतनगर से भाजपा विधायक हृदय नारायण दीक्षित ने वर्ष 1985 में निर्दलीय जीत दर्ज की थी। इससे पहले वर्ष 1957 में परमेश्वरदीन वर्मा ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।

आजादी के बाद कांग्रेस का रहा गढ़
विकास और जनता की अनदेखी इस सीट पर कभी 25 साल तक राज करने वाली कांग्रेस को भारी पड़ी। 1985 के बाद से कांग्रेस कभी पुरवा सीट पर मुख्य मुकाबले में नहीं आ पाई।

पुरवा सीट पर अब तक के विधायक
वर्ष विधायक दल
1951 रामधीन सिंह कांग्रेस
1957 परमेश्वरदीन वर्मा निर्दलीय
1962 रामाधीन सिंह कांग्रेस
1967 लाखन भारतीय जनसंघ
1969 दुलारेलाल कांग्रेस
1974 गया सिंह कांग्रेस
1977 चंद्रभूषण जनता पार्टी
1980 गया सिंह कांग्रेस
1985 हृदय नारायण दीक्षित निर्दलीय
1989 हृदय नारायण दीक्षित जनता दल
1991 हृदय नारायण दीक्षित जनता पार्टी
1993 हृदय नारायण दीक्षित सपा
1996 उदयराज यादव सपा
2002 उदयराज यादव सपा
2007 उदयराज यादव सपा
2012 उदयराज यादव सपा
2017 अनिल सिंह बसपा