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आखिर क्या होती है हीटवेव या लू? कैसे करें बचाव, आखिर कब मिलेगी हीटवेव से राहत

देश की अधिकतर हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव (गर्म हवा या लू) ने कहर बरपा रखा है। कुछ हिस्सों में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। दिल्ली में गर्मी ने पिछले 72 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, गर्मी और हीटवेव का सितम 2 मई तक जारी रहेगा। इसके लिए उसने कई राज्यों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट भी जारी कर रखा है।आइए जानते हैं क्या है हीटवेव।

वर्तमान में क्या है गर्मी के हालात?

पिछले छह सप्ताह में दिल्ली का तापमान सामान्य से 4 डिग्री ऊपर रहा है।  राजस्थान का धौलपुर 46.5 डिग्री तापमान के साथ सबसे गर्म शहर रहा।आने वाले दिनों में जोधपुर और बीकानेर में तापमान 45-47 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। IMD ने हीटवेव जारी रहने की चेतावनी दी है।इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी, मध्य और झारखंड में शुक्रवार और शनिवार के लिए ऑरेंज तथा 3 मई तक सभी हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।

आखिर क्या होती है हीटवेव या लू?

IMD के अनुसार, तापमान में वृद्धि और मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री, पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री और तटीय क्षेत्रों में 37 डिग्री से अधिक होने पर संबंधित इलाकों को हीटवेव की चपेट में माना जाता है।इसी तरह जब किसी इलाके में तापमान सामान्य से 4.5 से छह डिग्री ऊपर पहुंचता है तो हीटवेव क्षेत्र घोषित किया जाता है।इस दौरान इन इलाकों में तेज गर्मी के साथ गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों को बेहाल करते हैं।

क्या है हीटवेव बनने के कारण?

IMD के अनुसार, यदि उत्तर-पश्चिमी भारत से गर्म और शुष्क हवाएं चलती हैं तो आसमान साफ ​​रहता है। इसी तरह यदि नमी में गिरावट होती है तो तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है। इसके कारण कुछ दिनों के लिए कुछ इलाकों में हीटवेव गंभीर स्तर पर पहुंच जाती है।इसके अलावा बढ़ता तापमान सौर विकिरण में वृद्धि और मध्य-पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों पर एक उच्च दबाव क्षेत्र का कारण भी रहता है। इससे यहां ज्यादा हीटवेव रहती है।

क्या हीटवेव घातक हैं?

हीटवेव में अत्यधिक पसीने के कारण निर्जलीकरण के चलते किसी व्यक्ति की जान भी जा सकती है। इसी तरह खून में सोडियम और पोटेशियम सांद्रता में परिवर्तन हृदय और तंत्रिका कोशिकाओं को भ्रमित कर सकता है। इससे सांस लेने और रक्तप्रवाह में परेशानी होती है।

क्या है हीटवेव की चपेट में आने के लक्षण?

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ केसी शर्मा ने मीडिया  को बताया कि हीटवेव की चपेट में आने वाले व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने, सिर दर्द, उल्टी, दस्त, तेज पसीना, झटके महसूस होना, चक्कर आने और मांसपेशियों में ऐंठन की शिकायत हो सकती है। इनमें से कोई सा भी लक्षण नजर आने पर तत्काल चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।उन्होंने बताया कि हीटवेव की चपेट में आए व्यक्ति के लापरवाही बरतने पर उसकी जान भी जाने का खतरा रहता है।

कैसे करें हीटवेव से बचाव?

डॉ शर्मा ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए और हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनने चाहिए।इसी तरह बिना काम धूप में बाहर नहीं निकले और आवश्यक हो तो सिर पर कपड़ा, टोपी, रुमाल बांधकर ही बाहर निकलें।उन्होंने बताया कि यात्रा करते समय अपने साथ बोतल में पानी जरूर रखें और ORS का घोल का पियें। इसी तरह नशीले पदार्थों का सेवन बंद करते हुए उच्च प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करें।

कब मिलेगी हीटवेव से राहत?

मौसम विभाग ने दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में 2 से 4 मई तक बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने का अनुमान लगाया है। इससे इन राज्यों में हीटवेव से राहत मिल सकती है।विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके जेनामणि ने बताया कि 4 मई को अंडमान सागर में एक चक्रवाती परिसंचरण तंत्र विकसित होगा, जिसके बाद 5 मई को निम्न दबाव का क्षेत्र बनेगा और इसके प्रभाव में अधिकतम तापमान में गिरावट की संभावना है।

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