Breaking News
Home / नौकरी / अब इस देश में पढ़ाई करना हुआ आसान, दाखिले के लिए ये है जरुरी डॉक्यूमेंट, पढ़ें पूरी डिटेल

अब इस देश में पढ़ाई करना हुआ आसान, दाखिले के लिए ये है जरुरी डॉक्यूमेंट, पढ़ें पूरी डिटेल

नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय छात्रों में अमेरिका में पढ़ाई करना अब और भी आसान हो गया है।कई अमेरिकी यूनिवर्सिटी भारतीय स्टूडेंट्स को अपने यहां एडमिशन देती हैं। कुछ में विशेष स्कॉलरशिप देने का प्रावधान भी है। लेकिन स्टूडेंट वीजा हासिल करने का काम छात्र के जिम्मे ही होता है. अमेरिका में स्थित यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने के लिए 3 तरह के वीजा हासिल किए जा सकते हैं। अगर आप अमेरिका मे पढ़ाई करना चाहते हैं तो आपको इनके बारे में पता होना चाहिए। अमेरिकी यूनिवर्सिटी में विदेशी स्टूडेंट्स के तौर पर सबसे ज्यादा एप्लीकेशन भारतीयों की आती है। हर साल बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स हायर एजुकेशन के लिए भारत का रुख करते हैं। जानिए सेमेस्टर शुरू होने से पहले किन दस्तावेजों की जरूरत होती है, स्टूडेंट वीजा कितनी तरह के होते हैं और अमेरिका में पढ़ाई का पैटर्न क्या है।

भारतीय स्टूडेंट्स फॉरेन एजुकेशन के लिए चीन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रशिया जैसे देशों में जाना पसंद करते हैं। विदेश की किसी भी टॉप यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना आसान नहीं होता है. विदेशी यूनिवर्सिटी में एडमिशन हासिल करने के लिए वहां के वीजा संबंधी नियमों की जानकारी होना भी जरूरी है। किसी भी अमेरिकी यूनिवर्सिटी में अप्लाई करने से पहले पढ़ाई का पैटर्न समझना जरूरी है। अमेरिका में हायर एजुकेशन को 4 श्रेणियों में बांटा जाता है- एसोसिएट डिग्री (एए, एएस, एएएस), स्नातक डिग्री, मास्टर डिग्री और पीएचडी या डॉक्टरेट की डिग्री। हर स्तर को पास करने के लिए अलग-अलग क्रेडिट की जरूरत होती है। स्टूडेंट्स को हर सेमेस्टर के आखिर में उनके प्रदर्शन के आधार पर क्रेडिट दिए जाते हैं। 1 सेमेस्टर लगभग 30 क्रेडिट का होता है। ज्यादातर यूनिवर्सिटी स्नातक यानी ग्रेजुएशन की डिग्री के लिए कुल 120-130 क्रेडिट और मास्टर्स डिग्री के लिए हर सेमेस्टर में कुल 30-64 क्रेडिट मांगती हैं। आप जिस यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अप्लाई कर रहे हैं, वहां का क्रेडिट सिस्टम पता कर लें। अमेरिका फॉरेन स्टूडेंट्स को 3 तरह के वीजा देता है।

Check Also

रिपोर्ट : लगातार बढ़ रहे गुस्से और चिढ़चिढ़ेपन के कारण रिश्ते हो रहे शर्मसार

नई दिल्‍ली। क्‍या रिश्‍तों की नई परिभाषा गढ़ी जानी चाहिए? दरअसल आजकल बच्चों और माता-पिता ...