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अंधविश्वास : भूत प्रेत के चक्कर में जला देते हैं नवजात की उंगली, खबर पढ़कर उड़ जायेंगे आपके होश

नवजात में होने वाले सामान्य खतरे को मानते हैं जमोगा

खौलते तेल में उंगली जलाने से हो जाता है गंभीर संक्रमण

बहराइच l नवजात में किसी भी तरह के संक्रमण की आशंका होने पर परिवार वाले ही नवजात की उंगली को खौलते तेल में डालकर दाग देते हैं। विश्वास है कि अब उनका बच्चा सदा संक्रमण मुक्त रहेगा। उनका यही विश्वास उस समय तार-तार हो जाता है जब नवजात की जली उंगली सक्रमित होकर सड़ने लगती है और झाड़-फूंक के चक्कर में संक्रमण बढ़कर नवजात की जान ले लेती है।

जनपद के मेडिकल कालेज में भर्ती शिशु की माँ ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि उसके शिशु का शरीर नीला पड़ गया था। परिवार की कुछ महिलाओं ने इसे जमोगा यानि लाग बाधा बताया। इससे निजात पाने के लिए खौलते तेल में शिशु की उंगली डाल दी गयी। इसकी वजह से उंगली में सड़न पैदा हो गयी। इसके बाद उसे बहराइच मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। जहां वह जिंदगी की जंग हार गयी । यह एक घटना नहीं है न ही किसी विशेष क्षेत्र में ऐसा हो रहा है बल्कि पड़ोसी जिलों समेत नेपाल से भी ऐसे बच्चे भर्ती होते रहते हैं।

मुख्य चिकत्सा अधिकारी डॉ एसके सिंह ने बताया कि नवजात को किसी भी तरह की समस्या होने पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज संभव है। उन्होंने अपील की है कि किसी के बहकावे में न आयें। जमोगा नाम की कोई बीमारी नहीं होती है। गर्म तेल में नवजात की उंगली न डालें। इससे उंगली सड़ सकती है और बच्चे की जान भी जा सकती है।

*वर्षों से है परंपरा –*
तेजवापुर के यादवपुर निवासी सतगुर मौर्या 50 वर्ष के हैं । उनके दाहिने हाथ की छोटी उंगली आधी कटी हुई है। वह बताते हैं कि जमोगा ( भूत प्रेत या लाग बाधा ) भागने के लिए उनकी सगी बुआ ने खौलते तेल में उनकी उंगली डाल दी थी । बाद में सड़न पैदा होने की वजह से उनकी आधी उंगली काटनी पड़ी।

*गलतफहमी न पालें-*
मेडिकल कालेज के सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट के इंचार्ज और वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ असद अली ने बताया कि महीने में एक या दो ऐसे केस आते हैं। कई शिशु तो इस हालत में भर्ती होते हैं जिनकी पूरी हथेली सड़ चुकी होती है। उन्होने बताया कि नवजात शिशुओं में संक्रमण के सामान्य खतरे के लक्षणों को जमोगा बीमारी समझना गलतफहमी है।

*कब देते हैं दाग–*
शिशु का शरीर ठंडा पड़ने, सुस्त या बेहोश होने, स्तनपान न कर पाने, शिशु का शरीर नीला पड़ने या शिशु के न रोने पर उसकी उंगली को जल दिया जाता है।

*शिशु को संक्रमण से ऐसे बचाएं*
◆ जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराएं
◆ छह माह की आयु तक स्तनपान के अलावा कुछ भी न दें
◆ शिशु को साफ हाथों से ही छूएं
◆ शिशु की नाल साफ व सुखी रखें और उस पर कुछ न लगाएं
◆ शिशु को साफ सूती कपड़े से लपेट कर रखें
◆ खतरे के सामान्य लक्षण होने पर शिशु को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराएं

जिला स्वास्थ्य ,शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह का कहना है कि भूत प्रेत को भगाने के लिए नवजात की उंगली जलाना गैर कानूनी है, इसमें उंगली जलाने वालों को सजा हो सकती है। साथ ही इस तरह की गलत परंपराएं बच्चों को जान बूझ कर विकलांग बनाती है।

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