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सोनभद्र में चार सगे भाइयों को सात-सात वर्ष की कैद, जानिए क्या है आरोप

-17 वर्ष पूर्व महावीर को जान से मारने के आशय से लाठी डंडा से मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने का था आरोप

सोनभद्र (हि.स.)। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम खलीकुज्जमा की अदालत ने दोष सिद्ध पाकर चार सगे भाइयों को 17 वर्ष पूर्व महावीर को जान से मारने के आशय से लाठी डंडा से मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए 7-7 वर्ष की कैद व 11- 11 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 3-3 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के झापी टोला गोहड़ा गांव निवासी रामजी यादव पुत्र मोहर यादव ने दुद्धी थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि उसके सगे मामा महावीर यादव व सगे मामा रामवृक्ष यादव के परिवार के बीच पारिवारिक विवाद काफी दिनों से चला आ रहा है। इसी वजह से महावीर से रामवृक्ष के लड़के रंजिश रखते हैं। 30 मार्च 2006 को सुबह 09 बजे जब दो साइकिल से महावीर व उनका बेटा शिवनाथ के साथ आ रहा था। तभी रास्ते में महावीर के घर से थोड़ा आगे आने पर पहले से घात लगाकर छिपे हुए बालरूप यादव, भागवत यादव, शिवप्रसाद यादव व अयोध्या यादव और उनके पिता रामवृक्ष यादव बैठे थे। निवासीगण घुमा टोला झनकपुर, थाना बभनी, जिला सोनभद्र ने लाठी डंडा व कुल्हाड़ी से लैश होकर मामा महावीर के साथ ही उसे घेर लिया और मारने पीटने लगे।

इस दौरान वह गिर गया और मामा महावीर यादव को जान से मारने के आशय से मारते हुए गाली देते हुए जंगल की ओर लेकर चले गए। घटना को कई लोगों ने देखा। इस तहरीर पर बालरूप यादव, भागवत यादव, शिवप्रसाद यादव व अयोध्या यादव तथा रामवृक्ष यादव के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की गई। मामले की विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने न्यायालय में पांच लोगों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया था। इस दौरान विचारण रामवृक्ष यादव की मौत हो गई। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने पर दोष सिद्ध पाकर चार दोषियों बालरूप यादव, भागवत यादव, शिवप्रसाद यादव व अयोध्या यादव को 7- 7 वर्ष की कैद व 11- 11 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 3-3 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता कुंवर वीर प्रताप सिंह ने बहस की।

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