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समुद्र में ऊंची लहरें, तटीय क्षेत्र में बारिश शुरू…अरब सागर में उठे चक्रवात बिपरजॉय का भारत में तूफानी असर

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि बिपरजॉय अभी पोरबंदर से 290 किलोमीटर और जखाऊ बंदरगाह से 360 किलोमीटर की दूरी पर है। बिपरजॉय 15 जून की शाम तक जखाऊ बंदरगाह के पास सौराष्ट्र और कच्छ के तट से टकराएगा। इसे बेहद गंभीर श्रेणी में रखा गया है।

उधर, बिपरजॉय की वजह से मुंबई में मरीन ड्राइव पर हाई टाइड देखा गया। जुहू बीच के पास सोमवार को ऊंची लहरों की चपेट में आने से पांच युवक डूब गए। बिपरजॉय को लेकर तटीय इलाकों में चेतावनी जारी की गई है। बिपरजॉय 16 जून तक राजस्थान पहुंचेगा। इस वजह से उत्तर पश्चिम रेलवे ने कुछ ट्रेनों को रद कर दिया है।राजस्थान के कई इलाकों में 16-17 जून को भारी बारिश होने की संभावना है।

तूफान के खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल ने 12 टीमें तैनात की हैं। 15 टीमों को आपात स्थिति के लिए तैयार रखा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बिपरजॉय के कारण दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुरुवार और शुक्रवार को हल्की वर्षा होने की संभावना जताई है।

बिपरजॉय की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को समीक्षा बैठक में संवेदनशील स्थलों से लोगों की निकासी सुनिश्चित करने को कहा। प्रधानमंत्री ने बैठक के बाद ट्वीट किया-हमारी टीम संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों की सुरक्षित निकासी और आवश्यक सेवाओं का रखरखाव सुनिश्चित कर रही है। सभी की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रार्थना।

बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, पृथ्वी विज्ञान सचिव एम रविचंद्रन, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर और भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र शामिल हुए।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने समीक्षा बैठक में जानकारी दी कि चक्रवात बिपरजॉय के 15 जून की दोपहर तक गुजरात के जखाऊ बंदरगाह के पास मांडवी और पाकिस्तान के कराची के बीच सौराष्ट्र और कच्छ को बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में पार करने की उम्मीद है। चक्रवात के दौरान 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की हवा के साथ तूफान आ सकता है। हवा की रफ्तार 145 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

बिपरजॉय की गंभीरता को देखते हुए भारतीय तट रक्षक और नौसेना ने राहत, तलाश और बचाव कार्यों के लिए जहाजों और हेलीकाप्टरों को तैनात किया है। वायुसेना और सेना की अभियांत्रिकीय कार्यबल इकाइयां भी तैयार हैं।

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