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रामगंगा नदी के किनारे 10 किलोमीटर की पॉश कॉलोनियों व मोहल्लों पर बाढ़ का खतरा बरकरार

– बाढ़ की संभावना को देखते हुए गुरुवार से सक्रिय हुआ कंट्रोल रूम

– वर्ष 2010 में मुरादाबाद की रामगंगा में आई बाढ़ की विभीषिका आज भी लोगों को डरा देती हैं

मुरादाबाद   (हि.स.)। मानसून से पहले इस बार भी रामगंगा नदी के किनारे 10 किलोमीटर के क्षेत्र में एमडीए व आवास विकास की पॉश कॉलोनियों और अन्य कई मोहल्लों पर बाढ़ का खतरा बरकरार है। नदी पर तटबंध अब तक नहीं बना है। जबकि इसके लिए 13 साल से पहल चल रही है। मगर विभाग को तटबंध बनाने के लिए अब तक जमीन नहीं मिली है। जिससे तटबंध बनने का काम कागज तक सिमटा हुआ है। इससे हजारों की आबादी पर बाढ़ का खतरा मंडराने की आशंका बनी है। बाढ़ की संभावना को देखते हुए 15 जून से कंट्रोल रूम सक्रिय हो गया।

रामगंगा नदी किनारे शहर की पॉश कालोनियों और घनी आबादी वाले मोहल्लों में बरसात होने पर बाढ़ का खतरा रहेगा। वर्ष 2010 में मुरादाबाद की रामगंगा में आई बाढ़ की विभीषिका आज भी लोगों को डराती है। लाख प्रयास के बाद भी 13 वर्ष में रामगंगा नदी के किनारे तटबंध का निर्माण नहीं हो पाया हैं। सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड को तटबंध के लिए जमीन तक नहीं मिली है। ऐसे में बरसात में जलस्तर बढ़ने पर नदी किनारे बसी कॉलोनियों में बाढ़ का पानी घरों में भी घुस सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार जून के अंत तक मानसून सक्रिय हो सकता है। ऐसे में अधिक बारिश होने पर रामगंगा में जल स्तर बढ़ने पर आसपास के क्षेत्र में बाढ़ आती है। इस बार भी नदी के किनारे की पॉश कॉलोनियों चट्टापुल से लेकर रामगंगा विहार होते हुए कटघर तक का क्षेत्र खतरे के दायरे में है। वर्ष 2010 सितम्बर माह में रामगंगा नदी में बाढ़ आने पर कांठ रोड पर किले तक पानी आ गया था। तबसे प्रशासन ने शहर में बाढ़ के खतरे को देखते हुए तटबंध बनाने की कार्ययोजना बनाई। लेकिन जमीन न मिलने से अभी तक यह कार्य कागज पर ही सिमटा है।

अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग बाढ़ खंड अजय सिंह ने बताया कि कालागढ़ और तुमड़िया डैम में वर्ष 2010 में पानी अधिक होने से रामगंगा नदी में छोड़ा गया था। तटबंध के लिए मुरादाबाद विकास प्रधिकरण से जमीन आज तक नहीं मिल पाई है। बाढ़ खंड ने तटबंध के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा था। भविष्य में कभी नदियों का जलस्तर बढ़ने पर चट्टापुल से लेकर कटघर पुल तक रामगंगा नदी किनारे बसे लोगों पर जानमाल का खतरा बना है।

बताया कि इसके अलावा जनपद में दो तटबंध बलिया बल्लभगढ़ (सुरजननगर ठाकुरद्वारा ) 1.5 किलोमीटर और काजीपुरा डिलारी 2.88 किलोमीटर के क्षेत्र में बाढ़ खंड ने रेनकट पर पिछले वर्ष से लेकर अब तक मरम्मत करा दी है। काजीपुरा में पहले बाढ़ से लंबे क्षेत्र में रेनकट हुआ था। उसके लिए तटबंध से चार मीटर आगे बाढ़ का पानी रोकने को लेकर पौने तीन किलोमीटर में परक्यूपाइन स्टड लगाया गया।
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